समाज हमेशा बदलता रहता है। परिवार छोटे होते हैं, शहरों का विस्तार होता है, लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, रोजगार के नए तरीके सामने आते हैं और समय के साथ लोगों के रहने-सहने का तरीका भी बदलता है। भारत जैसे बड़े और विविध देश में इन बदलावों को समझना केवल शोधकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि सरकार और समाज दोनों के लिए जरूरी है।
यही वजह है कि Census 2027 सिर्फ देश की आबादी गिनने की कवायद नहीं है।
जनगणना सरकार द्वारा किए जाने वाले सबसे बड़े कामों में से एक है। आने वाली जनगणना दो चरणों में होगी। पहले चरण में घरों और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है, जबकि दूसरे चरण में देश की आबादी से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस बार पहली बार जनगणना का काम बड़े पैमाने पर डिजिटल तरीके से किया जा रहा है। साथ ही लोगों को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए खुद अपनी जानकारी देने की सुविधा भी दी गई है।
2026 में जनगणना का पहला चरण देश के कई हिस्सों में पूरा भी हो चुका है। महाराष्ट्र में घरों और आवास से जुड़ा यह काम 16 मई से 14 जून 2026 के बीच किया गया। इस दौरान गणनाकर्मियों ने मोबाइल ऐप के जरिए घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और घर में मौजूद संपत्तियों से जुड़े सवालों के जवाब दर्ज किए।
पहली नजर में किसी घर की स्थिति, उसमें मौजूद सुविधाओं या वहां रहने वाले लोगों की संख्या जैसी बातें सामान्य लग सकती हैं। लेकिन जब ऐसी करोड़ों जानकारियां एक साथ सामने आती हैं, तो उनसे यह समझने में मदद मिलती है कि भारतीय समाज किस तरह बदल रहा है।
मसलन, घरों और उनमें उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी जानकारी अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों के बीच की स्थितियों को समझने में मदद कर सकती है। आबादी से जुड़े आंकड़े यह समझने में मदद कर सकते हैं कि लोग कहां रहते हैं, आबादी में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं और किन इलाकों में किस तरह की सरकारी सुविधाओं की जरूरत हो सकती है। शिक्षा, पलायन और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी देश की बदलती तस्वीर को और साफ कर सकती है।
Census 2027 का एक और महत्वपूर्ण पहलू जाति की गणना से जुड़ा है। सरकार ने बताया है कि जनगणना के दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इस चरण के सवालों को, जिसमें जाति से जुड़े सवाल भी शामिल हैं, दूसरे चरण के शुरू होने से पहले अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया जाएगा।
जनगणना का डिजिटल होना भी अपने आप में बदलते भारत की एक तस्वीर है। सरकारी कामकाज और सेवाओं में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, जनगणना के दौरान दी गई व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने की बात सरकार ने स्पष्ट रूप से कही है। सरकार के अनुसार, व्यक्तिगत आंकड़ों को गोपनीय रखा जाएगा और प्रकाशित केवल समग्र आंकड़े किए जाएंगे।
लेकिन जनगणना का असली महत्व केवल बड़ी संख्या में आंकड़े जुटाने में नहीं है। इसकी अहमियत इस बात में है कि इन आंकड़ों से हम अपने समाज को कितना बेहतर समझ पाते हैं।
भारत की पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। तब से एक लंबा समय बीत चुका है। इस दौरान शहरों का विस्तार हुआ है, लोगों के एक जगह से दूसरी जगह जाने के तरीके बदले हैं, तकनीक रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है और परिवारों की जरूरतों और उम्मीदों में भी बदलाव आया है।
इसलिए Census 2027 आज के भारत को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, यह जानने का अवसर कि हमारे परिवार कैसे बदल रहे हैं, लोग कहां और किन परिस्थितियों में रह रहे हैं और देश की आबादी में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं।
किसी भी समाज के लिए अपने बारे में सही जानकारी होना जरूरी है। जनगणना एक तरह से देश का आईना है, और Census 2027 शायद भारत को यह देखने का एक नया मौका देगा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में हमारा समाज कितना बदल चुका है।